Two new Imprestion story..in hindi

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मिट्टी का खिलौना

एक गांव में एक कुम्हार रहता था, वो मिट्टी के बर्तन व खिलौने बनाया करता था, और उसे शहर जाकर बेचा करता था। जैसे तैसे उसका गुजारा चल रहा था, एक दिन उसकी बीवी बोली कि अब यह मिट्टी के खिलोने और बर्तन बनाना बंद करो और शहर जाकर कोई नौकरी ही कर लो, क्यूँकी इसे बनाने से हमारा गुजारा नही होता, काम करोगे तो महीने के अंत में कुछ धन तो आएगा। कुम्हार को भी अब ऐसा ही लगने लगा था, पर उसको मिट्टी के खिलोने बनाने का बहुत शौक था, लेकिन हालात से मजबूर था, और वो शहर जाकर नौकरी करने लगा, नौकरी करता जरूर था पर उसका मन अब भी, अपने चाक और मिट्टी के खिलोनों मे ही रहता था।

समय बितता गया, एक दिन शहर मे जहाँ वो काम करता था,उस मालिक के घर पर उसके बच्चे का जन्मदिन था। सब महंगे महंगे तोहफे लेकर आये, कुम्हार ने सोचा क्यूँ न मै मिट्टी का खिलौना बनाऊ और बच्चे के लिए ले जाऊ, वैसे भी हम गरीबों का तोहफा कौन देखता है। यह सोचकर वो मिट्टी का खिलौना ले गया. जब दावत खत्म हुई तो उस मालिक के बेटे को और जो भी बच्चे वहा आए थे सबको वो खिलोना पंसद आया और सब जिद करने लगे कि उनको वैसा ही खिलौना चाहिए। सब एक दूसरे से पूछने लगे की यह शानदार तोहफा लाया कौन, तब किसी ने कहा की यह तौहफा आपका नौकर लेकर आया.

सब हैरान पर बच्चों के जिद के लिए, मालिक ने उस कुम्हार को बुलाया और पूछा कि तुम ये खिलौना कहाँ से लेकर आये हो, इतना मंहगा तोहफा तूम कैसे लाए? कुम्हार यह बाते सुनकर हंसने लगा और बोला माफ कीजिए मालिक, यह कोई मंहगा तोहफा नही है, यह मैने खुद बनाया है, गांव मे यही बनाकर मै गुजारा करता था, लेकिन उससे घर नही चलता था इसलिए आपके यहाँ नौकरी करने आया हूं। मालिक सुनकर हैरान हो गया और बोला की तुम क्या अभी यह खिलोने और बना सकते हो, बाकी बच्चों के लिए? कुम्हार खुश होकर बोला हाँ मालिक, और उसने सभी के लिए शानदार रंग बिरंगे खिलौने बनाकर दिए।

यह देख मालिक ने सोचा क्यूँ ना मै, इन खिलौने का ही व्यापार करू और शहर मे बेचू। यह सोचकर उसने कुम्हार को खिलौने बनाने के काम पर ही लगा दिया और बदले मे हर महीने अचछी तनख्वाह और रहने का घर भी दिया। यह सब पाकर कुम्हार और उसका परिवार भी बहुत खुश हो गया और कुम्हार को उसके पंसद का काम भी मिल गया.



 पुजारी और बकरी 

 एक बार, एक छोटे से गाँव में एक पवित्र पुजारी रहता था।  वे बहुत ही मासूम और सरल विचारों वाले व्यक्ति थे, धार्मिक अनुष्ठान करते थे।  एक अवसर पर, उन्हें एक धनी व्यक्ति द्वारा उनकी सेवाओं के लिए बकरी से पुरस्कृत किया गया था।  पुरोहित इनाम के रूप में एक बकरी पाकर खुश था।  उन्होंने खुशी-खुशी बकरी को अपने कंधे पर उठा लिया और अपने घर की ओर यात्रा शुरू कर दी।  रास्ते में तीन धोखेबाजों (ठगों) ने पुजारी को बकरी ले जाते देखा।

 वे सभी आलसी थे और पुजारी को धोखा देना चाहते थे ताकि वे बकरी को निकाल सकें।  उन्होंने कहा, “यह बकरी हम सभी के लिए स्वादिष्ट भोजन बनाएगी।  आइए किसी तरह इसे प्राप्त करें ”।  उन्होंने आपस में इस विषय पर चर्चा की और पुजारी को मूर्ख बनाकर बकरी प्राप्त करने की योजना तैयार की।  योजना तय करने के बाद, वे एक-दूसरे से अलग हो गए और पुजारी के रास्ते में तीन अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग छिपने वाले स्थान ले लिए।

 जैसे ही पुजारी एकांत स्थान पर पहुंचे, उनमें से एक चूचा अपने छिपने की जगह से बाहर आया और पुजारी से एक चौंकाने वाले तरीके से पूछा, “सर, आप क्या कर रहे हैं?  मुझे समझ में नहीं आता है कि आपके जैसे पवित्र व्यक्ति को अपने कंधों पर एक कुत्ते को ले जाने की आवश्यकता क्यों है? ”पुजारी ऐसे शब्दों को सुनकर हैरान था।  वह चिल्लाया, "क्या तुम नहीं देख सकते?  यह कुत्ता नहीं बल्कि बकरी है, आप मूर्ख हैं। ”  धोखेबाज़ ने जवाब दिया, “सर, मैं आपसे क्षमा चाहता हूँ।  मैंने तुम्हें देखा था कि मैंने क्या देखा।  यदि आप इसे मानते हैं तो मुझे खेद है ”।  पुजारी विसंगति पर नाराज था, लेकिन एक बार फिर से अपनी यात्रा शुरू कर दी।

 पुजारी मुश्किल से एक दूरी पर चला गया था, जब एक और धोखा उसकी छिपने की जगह से बाहर आया और पुजारी से पूछा, “सर, आप अपने कंधों पर एक मृत बछड़ा क्यों रखते हैं?  आप एक बुद्धिमान व्यक्ति लगते हैं।  इस तरह का कृत्य आपकी ओर से शुद्ध मूर्खता है।  पुजारी चिल्लाया, “क्या?  आप मरे हुए बछड़े के लिए एक जीवित बकरी की गलती कैसे कर सकते हैं? ”दूसरे धोखेबाज ने जवाब दिया,“ सर, आपको इस संबंध में बहुत गलत लगता है।  या तो आप यह नहीं जानते कि बकरा कैसा दिखता है या आप इसे जानबूझकर कर रहे हैं।  मैंने आपको वही बताया जो मैंने देखा।  धन्यवाद"।  दूसरा धोखा मुस्कुराता हुआ चला गया।  पुजारी भ्रमित हो गया लेकिन आगे चलना जारी रखा।

 जब तीसरा धोखा उसे मिला, तब प्रीस्ट ने थोड़ी दूरी तय की थी।  तीसरे धोखेबाज ने हँसते हुए पूछा, “महाराज, आप अपने कंधों पर एक गधा क्यों रखते हैं?  यह आपको हंसी का पात्र बनाता है ”।  तीसरे ठग के शब्दों को सुनकर, पुजारी वास्तव में चिंतित हो गए।  वह सोचने लगा, “क्या यह वास्तव में बकरी नहीं है?  क्या यह किसी प्रकार का भूत है? ”

 उसने सोचा कि वह जिस जानवर को अपने कंधों पर ले जा रहा था, वह वास्तव में किसी प्रकार का भूत हो सकता है, क्योंकि इसने खुद को बकरी से कुत्ते में, कुत्ते से मृत बछड़े में और मृत बछड़े से गधे में बदल दिया।  पुजारी इस हद तक भयभीत हो गया कि उसने बकरी को सड़क किनारे फेंक दिया और भाग गया।  तीनों चालबाजों को भोला-भाला पुजारी हँसा।  उन्होंने बकरी को पकड़ लिया और उस पर दावत देकर खुश हुए।

 नैतिक: किसी को दूसरों के कहे अनुसार नहीं चलना चाहिए।  उन लोगों द्वारा मूर्ख मत बनो जो तुम्हारा लाभ उठाना चाहते हैं।






Intelligent monk ( बुद्धिमान साधु ) best Inspirational Story in hindi....

 बुद्धिमान साधु 

दोस्तों आज की कहानी बहुत ही अच्छी है। यह कहानी प्रेरणादायक है, इसमे आपको बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। तो चलिये पढ़ते है आज की नयी कहानी......

बच्चों की कहानियां किसी राजमहल के द्वारा पर एक साधु आया और द्वारपाल से बोला कि भीतर जाकर राजा से कहे कि उनका भाई आया है।


द्वारपाल ने समझा कि शायद ये कोई दूर के रिश्ते में राजा का भाई हो जो संन्यास लेकर साधुओं की तरह रह रहा हो!

सूचना मिलने पर राजा मुस्कुराया और साधु को भीतर बुलाकर अपने पास बैठा लिया।

साधु ने पूछा – कहो अनुज*,


Daan Punya ka Mahatva Hindi story

             दान पुण्य का महत्व 


एक व्यापारी जितना अमीर था उतना ही दान-पुण्य करने वाला, वह सदैव यज्ञ-पूजा आदि कराता रहता था।एक बार उसे व्यापार में घाटा चला गया ।अब उसके पास परिवार चलाने लायक भी पैसे नहीं बचे थे।व्यापारी की पत्नी ने सुझाव दिया कि पड़ोस के नगर में एक बड़े सेठ रहते हैं। वह दूसरों के पुण्य खरीदते हैं।



आप उनके पास जाइए और अपने कुछ पुण्य बेचकर थोड़े पैसे ले आइए, जिससे फिर से काम-धंधा शुरू हो सके।पुण्य बेचने की व्यापारी की बिलकुल इच्छा नहीं थी, लेकिन पत्नी के दबाव और बच्चों की चिंता में वह पुण्य बेचने को तैयार हुआ। पत्नी ने रास्ते में खाने के लिए चार रोटियां बनाकर दे दीं।

Daan Punya ka Mahatva Hindi story
Moral story


Two motivation new hindi story...

*जीवन वही है जो आप हैं*


एक छोटे से गांव के बाहर एक सुबह ही सुबह एक बैलगाड़ी आकर रुकी थी। और उस बैलगाड़ी में बैठे हुए आदमी ने उस गांव के द्वार पर बैठे हुए एक बूढ़े से पूछा, इस गांव के लोग कैसे हैं? मैं इस गांव में हमेशा के लिए स्थायी निवास बनाना चाहता हूं। उस बूढ़े ने कहा: मेरे अजनबी मित्र, इसके पहले कि मैं तुम्हें बताऊं कि इस गांव के लोग कैसे हैं, क्या मैं पूछ सकता हूं कि उस गांव के लोग कैसे थे, जिससे तुम आ रहे हो?

उस आदमी ने कहा: उनका नाम और उनका ख्याल ही मुझे क्रोध और घृणा से भर देता है। उन जैसे दुष्ट लोग इस पृथ्वी पर कहीं भी नहीं होंगे। उन शैतानों के कारण ही, उन पापियों के कारण ही तो मुझे वह गांव छोड़ना पड़ा है। मेरा हृदय जल रहा है। मैं उनके प्रति घृणा से और प्रतिशोध से भरा हुआ हूं। उनका नाम भी न लें। उस गांव की याद न दिलाएं।

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उस बूढ़े ने कहा: मैं क्षमा चाहता हूं। आप बैलगाड़ी आगे बढ़ा लें। इस गांव के लोग और भी बुरे हैं। मैं उन्हें बहुत वर्षों से जानता हूं।

वह बैलगाड़ी आगे बढ़ी भी नहीं थी कि एक घुड़सवार आकर रुक गया और उसने भी यही पूछा उस बूढ़े से कि इस गांव में निवास करना चाहता हूं। कैसे हैं इस गांव के लोग?
उस बूढ़े ने कहा: उस गांव के लोग कैसे थे जहां से तुम आते हो? उस घुड़सवार की आंखों में आनंद के आंसू आ गए। उसकी आंखें किसी दूसरे लोक में चली गईं। उसका हृदय किन्हीं की स्मृतियों से भर गया और उसने कहा, उनकी याद भी मुझे आनंद से भर देती है। कितने प्यारे लोग थे। और मैं दुखी हूं कि उन्हें छोड़ कर मुझे मजबूरियों में आना पड़ा है। लेकिन एक सपना मन में है कि कभी फिर उस गांव में वापस लौट कर बस जाऊं। वह गांव ही मेरी कब्र बने, यही मेरी कामना है। बहुत भले थे वे लोग। उनकी याद न दिलाना। उनकी याद से ही मेरा दिल टूटा जाता है। उस बूढ़े ने कहा: इधर आओ, हम तुम्हारा स्वागत करते हैं। इस गांव के लोगों को तुम उस गांव के लोगों से भी अच्छा पाओगे। मैं इस गांव के लोगों को भलीभांति जानता हूं।

लेकिन आपको मैं ये दोनों बातें बताए देता हूं। इसके पहले कि आपकी बैलगाड़ी पृथ्वी के द्वार से आगे बढ़ जाए, मैं आपको यह कह देना चाहता हूं कि इस पृथ्वी पर आप वैसे ही लोग पाएंगे जैसे आप हैं। इस पृथ्वी को आप आनंदपूर्ण पाएंगे, अगर आपके हृदय में आनंद की वीणा बजनी शुरू हो गई हो। और इस पृथ्वी को आप दुख से भरा हुआ पाएंगे, अगर आपके हृदय का दीया बुझा है और अंधकारपूर्ण है। आपके अतिरिक्त और कुछ भी नहीं है पृथ्वी! जीवन वही है जो आप हैं।






*बहरे मेंढक की कहानी*


एक तालाब में बहुत सारे मेंढक रहते थे। उस तालाब के ठीक बीचोंबीच एक बडा-सा लोहे का खम्बा वहां के राजा ने लगवाया हुआ था। एक दिन तालाब के मेंढको ने निश्चय किया कि “क्यों ना इस खम्भे पर चढ़ने के लिए रेस लगाई जाये”, जो भी इस खंभे पर चढ़ जायेगा, उसको प्रतियोगिता का विजेता माना जायेगा।

रेस का दिन निश्चित किया गया। कुछ दिनों बाद रेस का दिन आ गया। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए वहां कई मेढ़क एकत्रित हुए, पास के तालाब से भी कई मेंढ़क रेस में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे हुए थे, और प्रतियोगिता को देखने के लिए भी बहुत सारे मेंढ़क वहां एकत्रित हुए। रेस का आरंभ हुआ, चारों ओर शोर ही शोर था। सब उस लोहे के बड़े से खम्भे को देख कर कहने लगे “अरे इस पर चढ़ना नामुमकिन है” “इसे तो कोई भी नहीं कर पायेगा”। “इस खम्भे पर तो चढ़ा ही नहीं जा सकता”।

कभी कोई यह रेस पूरी नहीं कर पाएगा, और ऐसा हो भी रहा था, जो भी मेढ़क खम्भे पर चढ़ने का प्रयास करता, वो खम्भे के चिकने एवं काफी ऊँचा होने के कारण थोड़ा सा ऊपर जाकर नीचे गिर जाता। बार बार कोशिश करने के बाद भी कोई ऊपर खम्भे पर नहीं पहुँच पा रहा था। अब तक काफी मेंढ़क हार मान गए थे, और कई मेंढ़क गिरने के बाद भी अपनी कोशिश जारी रखे हुए थे। इसके साथ-साथ अभी भी रेस देखने आए मेंढक जोर-जोर से चिल्लाए जा रहे थे “अरे यह नहीं हो सकता”।

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“यह असंभव है” “कोई इतने ऊँचे खम्भे पर चढ़ ही नहीं सकता।” आदि, और ऐसा बार बार सुन सुन कर काफी मेंढक हार मान बैठे और उन्होंने भी प्रयास करना छोड़ दिया। और अब वो भी उन मेंढको का साथ देने लगे जो जोर-जोर से चिल्लाने लगे। लेकिन उन्ही मे से एक छोटा मेंढक लगातार कोशिश करने के कारण खम्भे पर जा पंहुचा, हालाँकि वो भी काफी बार गिरा, उठा, प्रयास किया तब कही जाकर वो सफलता पूर्वक खम्भे पर पहुंचा।

और रेस का विजेता घोषित किया गया। उसको विजेता देखकर, मेढ़को ने उसकी सफलता का कारण पूछा की यह असंभव कार्य तुमने कैसे किया, यह तो नामुमकिन था, यहाँ सफलता कैसे प्राप्त की, कृपया हमे भी बताए। तभी पीछे से एक मेंढ़क की आवाज़ आयी “अरे उससे क्या पूछते हो वो तो बहरा है।”

फिर भी मेढको ने विजेता मेंढक से पता करने के लिए एक ऐसे मेढक की मदद ली, जो उसकी सफलता का कारण जान सके, विजेता मेंढक ने बताया की मैं बहरा हूँ। मुझे सुनाई नही देता, लेकिन जब आप लोग जोर-जोर से चिल्ला रहे थे, तो मुझे लगा जैसे आप मुझसे कह रहे हो की “यह तुम्हारे द्वारा हो सकता है , यह तुम्हारे लिए मुमकिन है” इन्ही शब्दों ने मुझे सफलता दिलाई है।

सीख
तो दोस्तों, यह थी मेंढको की कहानी, लेकिन यह कहानी काफी हमारी जिंदगी से भी मिलती जुलती है, क्योंकि हम बाहर दुनिया की सुनते है जो हमेशा हमसे कहती है की “तुम यह नही कर सकते, सफल नही हो सकते, तुम्हारे बस की बात नही है आदि, क्योंकि हमारे अंदर सफलता पाने की क्षमता होती है और हम पा भी सकते है, लेकिन दुसरो की बातों में आ कर अपने लक्ष्य को पाने से चुक जाते है, जिसके कारण हम एक औसत जीवन जीते है। इसलिए आज से हमे उन सभी दृश्य एवं लोगो के प्रति अंधे एवं बहरे हो जाना चाहिए, जो हमे हमारे लक्ष्य से भटकाते है। ऐसा करने से आपको आपकी मंज़िल पाने से कोई नही रोक सकता।

Eak Hath Ka Nesanebaj Impressional Story

एक हाथ का निशानेबाज



दृढ इच्छाशक्ति की बेमिसाल कहानी !

बात 1920 की है। हंगरी आर्मी का एक नौजवान लड़का था जिसकी ज़िन्दगी में बस एक ही मकसद था; उसका मकसद था दुनिया का सबसे अच्छा pistol shooter बनना। अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वो दिन-रात मेहनत करता, घंटो प्रैक्टिस करता, और इसी का परिणाम था कि वो अपने देश के टॉप पिस्टल शूटर्स में गिना जाने लगा।



सन 1938 में , 28 साल का होते-होते उसने देश-विदेश की कई shooting championships जीत ली थी और सभी को यकीन हो चला था कि दांये हाथ का ये निशानेबाज 1940 के टोक्यो ओलंपिक्स में गोल्ड मैडल जीत कर ही दम लेगा!

लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंज़ूर था! एक आर्मी ट्रेनिंग सेशन के दौरान उसके दांये हाथ में मौजूद एक हैण्ड ग्रेनेड फट गया… इस हादसे में उसने अपना दांया हाँथ गंवा दिया और इसके साथ ही उसका ओलंपिक गोल्ड मैडल जीतने का सपना भी चकनाचूर हो गया। वह एक महीने तक हॉस्पिटल में पड़ा रहा और उसके बाद जब बाहर निकला तो उसकी दुनिया बदल चुकी थी…अब उसकी सबसे बड़ी ताकत उसका दांया हाथ उसके साथ नहीं था!

कोई आम इंसान होता तो क्या करता? अपने भाग्य को कोसता… लोगों की sympathy लेने की कोशिश करता या लोगों से कटने लगता, may be depression में चला जाता और अपने ज़िन्दगी के मकसद को भूल जाता।

लेकिन बचपन से दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शूटर बनने का सपना देखने वाला वो लड़का तो किसी और ही मिट्टी का बना था… बाकी लोगों की तरह उसने ये नहीं सोचा कि उसने अपना वो हाथ खो दिया है जिसे दुनिया का सबसे अच्छा शूटिंग हैण्ड बनाने में उसने दिन रात एक कर दिए…बल्कि उसने सोचा कि मेरा एक हाथ बेकार हो गया तो क्या…. अभी भी मेरे पास भगवान् का दिया एक और हाथ है जो पूरी तरह से ठीक है और अब मैं इसी हाथ को दुनिया का सबसे अच्छा शूटिंग हैण्ड बना कर रहूँगा!!! और अपने इसे attitude के साथ वो एक बार फिर शूटिंग प्रैक्टिस में जुट गया और असम्भव को सम्भव बनाने की कोशिश करने लगा।

लगभग एक साल बाद वो नेशनल शूटिंग चैंपियनशिप में पहुंचा! इतने समय बाद उसे वहां देख बाकी शूटर्स उसकी हिम्मत की दाद देने लगे कि इतना कुछ हो जाने पर भी वो उन्हें encourage करने के लिए आया है।

पर जल्द ही वे आश्चर्य में पड़ गए जब उन्ह पता चला कि वो उन्हें encourage करने के लिए नहीं बल्कि उनसे मुकाबला करने के लिए आया है।
मुकाबला हुआ…और पूरी दुनिया को हैरान करते हुए अदम्य साहस वाले उस सख्श ने अपने बाएँ हाथ से वो मुकाबला जीत लिया।

एक बार फिर लगने लगा कि वो दुनिया का सर्वश्रेष्ठ शूटर बनने का अपना सपना पूरा कर सकता है और ओलिंपिक में गोल्ड मैडल जीत सकता है। पर दुर्भाग्य तो मानो उसके पीछे पड़ा था… विश्व युद्ध की वजह से 1940 और 1944 के ओलंपिक गेम्स कैंसिल हो गए और सीधे 1948 London Olympics कराने का फैसला लिया गया।

इस बीच कितने ही नए शूटर्स अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाने के लिए खड़े हो गए…कहाँ अपने प्राइम डेज में उसे दाएं हाँथ से मुकाबला करना था और कहाँ इतने सालों बाद अब बाएँ हाँथ से विश्वस्तरीय मुकाबले में भाग लेना था।

पर उसे इन बातों की फ़िक्र ही कहाँ थी वो तो बस एक ही चीज जानता था….practice…practice... and…practice…वो दिन रात अभ्यास करता रहा… और लन्दन ओलंपिक्स में दुनिया के बेहतरीन शूटर्स के बीच मुकाबला करने उतरा… उसके साहस…उसकी हिम्मत और उसके धैर्य का आज इम्तहान था और उसने किसी को निराश नहीं किया वो उस इम्तहान में पास हो गया….उसने गोल्ड मैडल जीत लिया।

दोस्तों, उस लड़के का नाम था कैरोली टैकाक्स (Károly Takács) . और उसकी ये unbelievable story हर उस सख्स के लिए एक बहुत बड़ा सन्देश है जो जरा सी परेशानी आने पर हार मान लेते हैं, जो अपनी असफलता के पचास कारण गिनाने में आगे रहते हैं पर सफल होने की एक भी वजह नहीं बता पाते!

दोस्तों  दुनिया में बस एक ही इंसान है जो आपको कामयाब या नाकामयाब बना सकता है और वो इंसान आप खुद हैं। सफलता के संघर्ष में जब भी आपको लगे कि आपके साथ कुछ बुरा हुआ है तो एक बार उस एक हाथ वाले पिस्टल शूटर के बारे में ज़रूर सोचिये और खुद ही decide करिए कि क्या ये अपना एक हाथ खो देने से भी बुरा है… लाइफ में ups and downs को आने से हम नहीं रोक सकते…पर हम अपने साथ बुरा होने पर कैसे react करते हैं, इस चीज को ज़रुर control कर सकते हैं। इसलिए situation चाहे जितनी भी बुरी हो जाए अपना attitude positive बनाये रखिये, अपना ध्यान अपने लक्ष्य पर लगाए रखिये और इस दुनिया को अपनी मंजिल पाकर दिखाइए!

Two Impressional hindi Story

Hindi story



 Impressional hindi Story


दड़बे की मुर्गी 



एक शिष्य अपने गुरु के पास पहुंचा और बोला, ” लोगों को खुश रहने के लिए क्या चाहिए?”

“तुम्हे क्या लगता है?”, गुरु ने शिष्य से खुद इसका उत्तर देने के लिए कहा.


खुश रहने पर कहानी

शिष्य एक क्षण के लिए सोचने लगा और बोला, “मुझे लगता है कि अगर किसी की मूलभूत आवश्यकताएं पूरी हो रही हों… खाना-पीना मिल जाए …रहने के लिए जगह हो…एक अच्छी सी नौकरी या कोई काम हो… सुरक्षा हो…तो वह खुश रहेगा.”

यह सुनकर गुरु कुछ नहीं बोले और शिष्य को अपने पीछे आने का इशारा करते हुए चलने लगे.

वह एक दरवाजे के पास जाकर रुके और बोले, “इस दरवाजे को खोलो…”

शिष्य ने दरवाजा खोला, सामने मुर्गी का दड़बा था. वहां मुर्गियों और चूजों का ढेर लगा हुआ था… वे सभी बड़े-बड़े पिंजड़ों में कैद थे….

“आप मुझे ये क्यों दिखा रहे हैं.” शिष्य ने आश्चर्य से पूछा.

इस पर गुरु शिष्य से ही प्रश्न-उत्तर करने लगे.

“क्या इन मुर्गियों को खाना मिलता है?'”

“हाँ.”

“क्या इनके पास रहने को घर है?”

“हाँ… कह सकते हैं.”

“क्या ये यहाँ कुत्ते-बिल्लियों से सुरक्षित हैं?”

“हम्म”

“क्या उनक पास कोई काम है?”


“हाँ, अंडा देना.”

“क्या वे खुश हैं?”

शिष्य मुर्गियों को करीब से देखने लगा. उसे नहीं पता था कि कैसे पता किया जाए कि कोई मुर्गी खुश है भी या नहीं…और क्या सचमुच कोई मुर्गी खुश हो सकती है?

वो ये सोच ही रहा था कि गुरूजी बोले, “मेरे साथ आओ.”

दोनों चलने लगे और कुछ देर बाद एक बड़े से मैदान के पास जा कर रुके.  मैदान में ढेर सारे मुर्गियां और चूजे थे… वे न किसी पिंजड़े में कैद थे और न उन्हें कोई दाना डालने वाला था… वे खुद ही ढूंढ-ढूंढ कर दाना चुग रहे थे और आपस में खेल-कूद रहे थे.

“क्या ये मुर्गियां खुश दिख रही हैं?” गुरु जी ने पूछा.

शिष्य को ये सवाल कुछ अटपटा लगा, वह सोचने लगा…यहाँ का माहौल अलग है…और ये मुर्गियां प्राकृतिक तरीके से रह रही हैं… खा-पी रही रही है…और ज्यादा स्वस्थ दिख रही हैं…और फिर वह दबी आवाज़ में बोला-

“शायद!”

“बिलकुल ये मुर्गियां खुश है, बेतुके मत बनो,” गुरु जी बोले, ” पहली जगह पर जो मुर्गियों हैं उनके पास वो सारी चीजें हैं जो तुमने खुश रहने के लिए ज़रूरी मानी थीं.

उनकी मूलभूत आवश्यकताएं… खाना-पीना, रहना सबकुछ है… करने के लिए काम भी है….सुरक्षा भी है… पर क्या वे खुश हैं?

वहीँ मैदानों में  घूम रही मुर्गियों को खुद अपना भोजन ढूंढना है… रहने का इंतजाम करना है… अपनी और अपने चूजों की सुरक्षा करनी है… पर फिर भी वे खुश हैं…”

गुरु जी गंभीर होते हुए बोले, ” हम सभी को एक चुनाव करना है, “या तो हम दड़बे की मुर्गियों की तरह एक पिंजड़े में रह कर जी सकते हैं एक ऐसा जीवन जहाँ हमारा कोई अस्तित्व नहीं होगा… या हम मैदान की उन मुर्गियों की तरह जोखिम उठा कर एक आज़ाद जीवन जी सकते हैं और अपने अन्दर समाहित अनन्त संभावनाओं को टटोल सकते हैं…तुमने खुश रहने के बारे में पूछा था न… तो यही मेरा जवाब है… सिर्फ सांस लेकर तुम खुश नहीं रह सकते… खुश रहने के लिए तुम्हारे अन्दर जीवन को सचमुच जीने की हिम्मत होनी चाहिए…. इसलिए खुश रहना है तो दड़बे की मुर्गी मत बनो!”

Two Educational Story in hindi....



यह कुछ यैसी कहाँनियाँ जो की बहुत सारी education और knowledge के साथ entreating भी है लेकिन आज हम Two Educational Story लाये है दोस्तों जिनमे पहली hindi story घंटीधारी ऊंट है जो मजेदार कहानी और instructive story है जो की एक ऊंट की कहाँनी है इसी तरह  Educational story in hindi की है। 


दूसरी story चिड़िया और किसान है ये story in hindi पढ़े और कुछ नया सीखे और हमारी कहाँनियों क्या आपने सीख और समझा हमारे कमेंट बॉक्स में लिखकर बता सकते है हम प्रयास करेंगे की हम आप के सबालो का जबाब दे तो ये hindi story पढ़े।

घंटीधारी ऊंट


एक बार की बात हैं कि एक गांव में एक जुलाहा रहता था। वह बहुत गरीब था। उसकी शादी बचपन में ही हो गई ती। बीवी आने के बाद घर का खर्चा बढना था। यही चिन्ता उसे खाए जाती। फिर गांव में अकाल भी पडा। लोग कंगाल हो गए। जुलाहे की आय एकदम खत्म हो गई। उसके पास शहर जाने के सिवा और कोई चारा न रहा।
शहर में उसने कुछ महीने छोटे-मोटे काम किए। थोडा-सा पैसा अंटी में आ गया और गांव से खबर आने पर कि अकाल समाप्त हो गया हैं, वह गांव की ओर चल पडा। रास्ते में उसे एक जगह सडक किनारे एक ऊंटनी नजर आई। ऊटंनी बीमार नजर आ रही थी और वह गर्भवती थी। उसे ऊंटनी पर दया आ गई। वह उसे अपने साथ अपने घर ले आया।

घर में ऊंटनी को ठीक चारा व घास मिलने लगी तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो गई और समय आने पर उसने एक स्वस्थ ऊंट अच्चे को जन्म दिया। ऊंट बच्चा उसके लिए बहुत भाग्यशाली साबित हुआ। कुछ दिनों बाद ही एक कलाकार गांव के जीवन पर चित्र बनाने उसी गांव में आया। पेंटिंग के ब्रुश बनाने के लिए वह जुलाहे के घर आकर ऊंट के बच्चे की दुम के बाल ले जाता। लगभग दो सप्ताह गांव में रहने के बाद चित्र बनाकर कलाकार चला गया।

इधर ऊंटनी खूब दूध देने लगी तो जुलाहा उसे बेचने लगा। एक दिन वहा कलाकार गांव लौटा और जुलाहे को काफी सारे पैसे दे गया, क्योंकि कलाकार ने उन चित्रों से बहुत पुरस्कार जीते थे और उसके चित्र अच्छी कीमतों में बिके थे। जुलाहा उस ऊंट बच्चे को अपना भाग्य का सितारा मानने लगा। कलाकार से मिली राशी के कुछ पैसों से उसने ऊंट के गले के लिए सुंदर-सी घंटी खरीदी और पहना दी। इस प्रकार जुलाहे के दिन फिर गए। वह अपनी दुल्हन को भी एक दिन गौना करके ले आया।

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ऊंटों के जीवन में आने से जुलाहे के जीवन में जो सुख आया, उससे जुलाहे के दिल में इच्छा हुई कि जुलाहे का धंधा छोड क्यों न वह ऊंटों का व्यापारी ही बन जाए। उसकी पत्नी भी उससे पूरी तरह सहमत हुई। अब तक वह भी गर्भवती हो गई थी और अपने सुख के लिए ऊंटनी व ऊंट बच्चे की आभारी थी।

जुलाहे ने कुछ ऊंट खरीद लिए। उसका ऊंटों का व्यापार चल निकला।अब उस जुलाहे के पास ऊंटों की एक बडी टोली हर समय रहती। उन्हें चरने के लिए दिन को छोड दिया जाता। ऊंट बच्चा जो अब जवान हो चुका था उनके साथ घंटी बजाता जाटा।

एक दिन घंटीधारी की तरह ही के एक युवा ऊंट ने उससे कहा “भैया! तुम हमसे दूर-दूर क्यों रहते हो?”

घंटीधारी गर्व से बोला “वाह तुम एक साधारण ऊंट हो। मैं घंटीधारी मालिक का दुलारा हूं। मैं अपने से ओछे ऊंटों में शामिल होकर अपना मान नहीं खोना चाहता।”

उसी क्षेत्र में वन में एक शेर रहता था। शेर एक ऊंचे पत्थर पर चढकर ऊंटों को देखता रहता था। उसे एक ऊंट और ऊंटों से अलग-थलग रहता नजर आया। जब शेर किसी जानवर के झुंड पर आक्रमण करता हैं तो किसी अलग-थलग पडे को ही चुनता हैं। घंटीधारी की आवाज के कारण यह काम भी सरल हो गया था। बिना आंखों देखे वह घंटी की आवाज पर घात लगा सकता था।

दूसरे दिन जब ऊंटों का दल चरकर लौट रहा था तब घंटीधारी बाकी ऊंटों से बीस कदम पीछे चल रहा था। शेर तो घात लगाए बैठा ही था। घंटी की आवाज को निशाना बनाकर वह दौडा और उसे मारकर जंगल में खींच ले गया। ऐसे घंटीधारी के अहंकार ने उसके जीवन की घंटी बजा दी।

सीख -- जो स्वयं को ही सबसे श्रेष्ठ समझता हैं उसका अहंकार शीघ्र ही उसे ले डूबता हैं।
       



चिड़िया और किसान


एक गाँव में एक किसान रहता था. उसका गाँव के बाहर एक छोटा सा खेत था. एक बार फसल बोने के कुछ दिनों बाद उसके खेत में चिड़िया ने घोंसला बना लिया.

कुछ समय बीता, तो चिड़िया ने वहाँ दो अंडे भी दे दिए. उन अंडों में से दो छोटे-छोटे बच्चे निकल आये. वे बड़े मज़े से उस खेत में अपना जीवन गुजारने लगे.

कुछ महीनों बाद फसल कटाई का समय आ गया. गाँव के सभी किसान अपने खेतों की फ़सल की कटाई में लग गए. अब चिड़िया और उसके बच्चों का वह खेत छोड़कर नए स्थान पर जाने का समय आ गया था.

एक दिन खेत में चिड़िया के बच्चों ने किसान को यह कहते सुना कि कल मैं फ़सल कटाई के लिए अपने पड़ोसी से पूछूंगा और उसे खेत में भेजूंगा. यह सुनकर चिड़िया के बच्चे परेशान हो गए. उस समय चिड़िया कहीं गई हुई थी. जब वह वापस लौटी, तो बच्चों ने उसे किसान की बात बताते हुए कहा, “माँ, आज हमारा यहाँ अंतिम दिन है. रात में हमें दूसरे स्थान के लिए यहाँ से निकला होगा.”

Educational Story in hind

motivational story in hindi with pictures...

हैलो दोस्तों  Hindi Read Story मे आप सभी का स्वागत है। दोस्तों Hindi Story मे आज मै आपके लिए बढ़िया दो नयी Hindi Story लाया हूँ। आप सभी को आज की इन story in hindi मै बहुत ही आनंद आने वाला है। तो दोस्तों आज की Hindi स्टोरी पढ़िये और आनंद उठाये। ओर हमको Comment Box मे लिखकर जरूर बताइएगा की हमारी Hindi Story कैसी लगी धन्यबाद......। 



Three Balls Motivational Story in hindi


Three Balls एक ऐसी Motivational Story है जो हमें और आप को अच्छी शिक्षा देती जो की story for kids के लिए है लेकिन हमारे द्वारा लिखी गई सभी प्रकार की hindi story से आप सभी को कुछ ना कुछ सीखने को जरूर मिलता है।  तो दोस्तों हमारी सभी story in hindi से आप को कुछ नया सीखने जो importance of education in hindi में है लेकिन यह कहानी तीन गेंदों Three Balls पर आधारित है जिसको आप पढ़ेंगे तो आप को यह कहानी interesting लगेगी जो अपनी Life में अपने लक्ष्य को हासिल करने की शिक्षा देती है तो hindi story to read करे यह story in hindi.......

तीन गेंदें

Three Balls



संदीप परेशान होकर अपने गुरु के पास जाता है और कहता है -

गुरुजी आपने हमेशा समझाया है कि मेहनत और लगन से काम करते रहो सफलता मिलती रहेगी. मैं मेहनत और लगन से काम कर रहा हूं मुझे सफलता भी मिल रही है लेकिन उस सफलता के साथ जो खुशी जुड़ी होती है… जो सुकून जुड़ा होता है वह मुझे नहीं मिल रहा. मेरा बेटा एक बड़े स्कूल में पढ़ रहा है , मैं एक महंगा घर भी खरीद चुका हूं आपके बताए मेहनत के रास्ते पर चल रहा हूं, लेकिन खुश नहीं हूं! गुरुजी में खुश कैसे रहू कृपया मेरी मदद कीजिए.

गुरुजी मुस्कुराते हुए अंदर कमरे में गए और अपने हाथ में तीन गेंद लेकर आए जिसमें से-


एक कांच की गेंद थी...
एक रबड़ की गेंद थी...
एक चीनी मिट्टी की...


Dusaro ki galtiyon se sikh story in hindi

यह hindi story कुछ मजेदार और interesting होने बाली है क्यों की यह story कुछ इस प्रकार की शिक्षा education देती है की हमें दूसरो की गलती से भी सीख लेनी चाहिए क्यों की दोस्तों अग़र हमारे सामने अग़र कोई इंसान कुछ mistake करता है तो उसके द्वारा किये गये कार्य में जो भी mistake बह करता है तो उससे हमे सीख लेनी चाहिए की उसके द्वारा क्या गलत काम (work) किया गया है.

उसे देख कर हम भी दोहराने का प्रयास ना करे तो दोस्तों यह story in hindi हमें यह बताने की कोसिस करती है की दोसरो की गलती mistake से हमे सीख लेनी चाहिए की हम बह गलत काम कभी ना करे... ये तो आप को यह story in hind को पढ़ कर पता चलेगा तो सुरु करते है hindi story...


   दूसरों की गलतियों से सीख 


दो दोस्त थे राम और मोहन। राम अपने जीवन के कठीन समय से गुजर रहा था। उसे जीवन में बार असफलता मिल रही थी। लेकिन मोहन एक ऊंची उपलब्धिया हासिल करने बाला था। मोहन की खास बात यह थी की वह जो भी काम करता था। उसमे सफल जरूर होता था। एक दिन राम, मोहन से मिलने आया, और उससे उसकी सफलता का राज पूछा। यह सुनकर मोहन मुस्कुराने लगा, और बोला की असफल व्यक्तियों की असफलताओं से ही मैंने सफल होना सीखा है।

यह सुनकर राम सोच में पड़ गया और बोला कि यह कैसे संभव है। किसी असफल व्यक्ति की असफलताओं से सीखकर तुम सफल कैसे बन सकते हो। मोहन ने कहा – मैं तुम्हे यह राज बता दूँगा लेकिन पहले मुझे बताओ की तुम असफल कैसे हुए। राम ने कहा – मेरे पास बहुत पैसा था, और मैं एक अमीर व्यक्ति का जीवन जी रहा था। मैं ओर भी अधिक पैसा कमाना चाहता था। इसलिए मैंने एक कंपनी खोली। मैं जल्दी सफल होना चाहता था। इसलिए उसी साल मैंने दूसरी कंपनी भी खोल दी।